जिले के बारे में

परिचय:

वर्तमान मधेपुरा जिले को 09/05/1845 को ही अनुमंडल का दर्जा प्राप्त हो गया था, जिसमें सात प्रखंड थे। उस समय आज का सहरसा जिला, मधेपुरा का राजस्व क्षेत्र था। जब 01/04/1954 को सहरसा जिला बना, तब मधेपुरा उसका अनुमंडल बन गया। उस समय मधेपुरा अनुमंडल में सात प्रखंड थे। इसे 09/05/1981 को जिले का दर्जा दिया गया।

21/05/1983 को उदाकिशुनगंज प्रखंड को उन्नत करके मधेपुरा जिले के उदाकिशुनगंज नामक अनुमंडल के रूप में स्थापित किया गया। सात पुराने प्रखंडों के अलावा, वर्ष 1994 में चार नए प्रखंड अस्तित्व में आए। ये थे—ग्वालपाड़ा, पुरैनी, बिहारीगंज और शंकरपुर। पहले तीन प्रखंड उदाकिशुनगंज अनुमंडल के अंतर्गत आते हैं और अंतिम प्रखंड मधेपुरा अनुमंडल के अंतर्गत आता है। बाद में वर्ष 1999 में मधेपुरा अनुमंडल के अंतर्गत दो और नए प्रखंडों का गठन किया गया, जिनके नाम घैलाढ़ और गम्हरिया हैं।

प्रशासनिक व्यवस्था:

जिला दो अनुमंडलों, 13 प्रखंडों और 13 अंचलों में विभाजित है।

विवरण

जानकारी

जनसंख्या घनत्व

400 प्रति वर्ग किलोमीटर

भौगोलिक क्षेत्रफल

1792.50 वर्ग किलोमीटर

मुख्य फसलें

धान, गेहूँ, मक्का, जूट, तिलहन/सूरजमुखी, दलहन

मुख्य बागवानी फसलें

आम, केला, अमरूद, नारियल, लीची

जलवायु संबंधी स्थिति:

मधेपुरा जिला 25°31′ से 26°20′ अक्षांश के बीच तथा 86°36′ से 87°07′ देशांतर के मध्य स्थित है। इस जिले का अधिकतम तापमान 35 से 40 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है तथा न्यूनतम तापमान 7 से 9 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है। इस जिले में औसत वार्षिक वर्षा 1300 मिमी है।

कृषि भूमि का उपयोग:

खेती के लिए कुल भूमि का क्षेत्रफल 1,36,646 हेक्टेयर है। इसके अतिरिक्त, 1772 हेक्टेयर परती भूमि है, जिसका उपयोग खेती के लिए किया जा सकता है। 1272 हेक्टेयर बंजर भूमि रेत से ढकी हुई है तथा शेष बंजर भूमि का क्षेत्रफल 3644 हेक्टेयर है।

धान की खेती का क्षेत्रफल 52165 हेक्टेयर है। गेहूँ 31431 हेक्टेयर भूमि पर, मक्का 34098 हेक्टेयर भूमि पर, गन्ना 801 हेक्टेयर भूमि पर तथा आलू 1442 हेक्टेयर भूमि पर उगाया जाता है। केंद्र सरकार के स्वामित्व वाला नारियल विकास बोर्ड भी इसी जिले में स्थित है।

उद्योग एवं व्यवसाय:

कृषि और उद्योग के क्षेत्र में उचित विकास की कमी के कारण जिले में उद्योग एवं व्यवसाय की स्थिति अत्यंत दयनीय है। जिले में कोई बड़ा उद्योग स्थापित नहीं हुआ है। यहाँ तक कि लघु उद्योगों की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है।